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यूक्रेन की रक्षा कंपनी फायर पॉइंट ने बढ़ा-चढ़ाकर बताई कीमत, जांच शुरू

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कीव (यूक्रेन), 29 अगस्त (Udaipur Kiran) । यूक्रेन का भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एनएबीयू) देश की स्टार डीप-स्ट्राइक ड्रोन कंपनी ‘फायर पॉइंट’ के खिलाफ सरकार को गुमराह करने के आरोपों की जांच कर रहा है। ‘फायर पॉइंट’ पर आरोप है कि उसने कीमतों और आपूर्ति के मामले में सरकार को गुमराह किया। ‘फायर पॉइंट’ देश के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के पूर्व फिल्म स्टूडियो के सह मालिक की कंपनी है। कंपनी की मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी इरीना तेरेख ने ऐसे किसी भी आरोप को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

कीव इंडिपेंडेंट अखबार ने अपनी खबर में इस रक्षा सामग्री के कल-पुर्जों की खरीद-फरोख्त से जुड़े पांच सूत्रों के हवाले से एनएबीयू के जांच शुरू करने की जानकारी दी है। हथियार निर्माता कंपनी ‘फायर पॉइंट’ को कथित तौर पर ‘अंतिम लाभार्थी’ बताया गया है। कीव इंडिपेंडेंट ने उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर कहा है कि हाल तक यह हथियार निर्माता कंपनी यूक्रेन के रक्षा हलकों में लगभग अनजान थी। मगर यह रक्षा मंत्रालय के ड्रोन बजट फंड के सबसे बड़े प्राप्तकर्ताओं में से एक प्रतीत होती है।

‘फायर पॉइंट’ ने कुछ हफ्तों में पश्चिमी मीडिया में अपने एफपी-1 डीप-स्ट्राइक ड्रोन और फ्लेमिंगो क्रूज मिसाइल का प्रचार करते हुए आकर्षण का केंद्र बन गई है। जेलेंस्की ने पिछले सप्ताह फ्लेमिंगो को यूक्रेन की सबसे सफल मिसाइल बताया था। फ्लेमिंगो रूस के लगभग चार साल के व्यापक आक्रमण से बचाव के लिए यूक्रेन के शस्त्रागार में है। ‘फायर पॉइंट’ लंबी दूरी के स्ट्राइक ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का निर्माण करती है।

एनएबीयू के अधिकारी इस आरोप की तेजी से जांच कर रहे हैं कि फायर पॉइंट ने अपने कल-पुर्जों की कीमत बढ़ा-चढ़ाकर बताई है। इस पर एनएबीयू के प्रवक्ता ने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि यह जांच की गोपनीयता से संबंधित है। फायर पॉइंट ने जांच शुरू होने की पुष्टि की है। मगर मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी इरीना तेरेख ने कहा है, जहां कोई रहस्य नहीं है, वहां रहस्यों की तलाश करना कोई मतलब नहीं रखता। सूत्रों ने बताया कि फायर पॉइंट का अंतिम स्वामित्व तैमूर मिंडिच के पास था। वह व्यवसायी हैं और जेलेंस्की के टेलीविजन स्टूडियो क्वार्टल 95 के सह-मालिक हैं। एनएबीयू ने मिंडिच से जुड़े किसी भी सवाल का जवाब देने से भी इनकार कर दिया है। मिंडिच के वकील ने कहा कि उन्हें अपने मुवक्किल और फायर पॉइंट के बीच किसी संबंध के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

कीव इंडिपेंडेंट के अनुसार, कंपनी ने 2024 में सरकार को 13.2 अरब हंड्रेड रियाल मूल्य के अपने एफपी-1 लंबी दूरी के ड्रोन बेचे। रक्षा मंत्रालय ने अपने वार्षिक बजट के अनुसार ड्रोन खरीद पर कुल 43 अरब हंड्रेड रियाल खर्च किए। इससे फायर प्वाइंट को कुल राशि का लगभग एक तिहाई हिस्सा मिला। तेरेख ने बताया कि कंपनी ने 2024 में लगभग 2,000 लंबी दूरी के ड्रोन बेचे। कंपनी इन ड्रोनों को लगभग 55,000 डॉलर प्रति ड्रोन की दर से बेचती है।

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कॉर्पोरेट दस्तावेजों के अनुसार, 2023 और 2024 के बीच कंपनी का राजस्व 40 लाख डॉलर से बढ़कर 10 करोड़ डॉलर से अधिक हो गया। यही नहीं, उसके कर्मचारियों की संख्या 2023 में 18 से बढ़कर वर्तमान में 2,200 हो गई है। फायर पॉइंट के अनुबंधों की जानकारी रखने वाले एक सूत्र का कहना है कि कंपनी को 2025 में सरकारी अनुबंधों से एक अरब डॉलर से ज्यादा की राशि मिलने की उम्मीद है। तेरेख ने डेनिश मॉडल के तहत रक्षा मंत्रालय के जरिए फायर पॉइंट को मिलने वाली यूरोपीय फंडिंग के जरिए धन प्राप्त करने की बात स्वीकार की।

तेरेख ने बताया कि फायर पॉइंट को मई में घोषित जर्मन सरकार के साथ पांच अरब यूरो के सौदे के तहत भी धन प्राप्त हुआ है। फायर पॉइंट ने हाल ही में एक साक्षात्कार में बताया था कि कंपनी प्रतिदिन लंबी दूरी के 100 एफपी-1 ड्रोन का उत्पादन कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा रहा है।

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(Udaipur Kiran) / मुकुंद

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