भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 24वें गवर्नर रह चुके उर्जित पटेल को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में 3 साल के लिए कार्यकारी निदेशक बनाया है। वे एक अनुभवी अर्थशास्त्री हैं, जो भारत के आर्थिक नीतियों को हमेशा वैश्विक मंच पर पेश करते हैं। साल 2016 में उन्होंने आरबीआई के 24वे गवर्नर के रूप में कार्यभार संभाला था। उसके पहले रघु रमन राजन आरबीआई के गवर्नर थे। उनका कार्यकाल साल 2018 तक ही रहा, क्योंकि उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
नोटबंदी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका
जब गवर्नर के रूप में उर्जित पटेल के कार्यकाल को केवल दो ही महीने बीते थे तभी पीएम नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी। उस समय 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद कर दिया गया था। उस दौरान नोटबंदी की पूरी प्रक्रिया को संभाल रही आरबीआई की टीम का नेतृत्व उर्जित पटेल कर रहे थे।
भारतीय अर्थव्यवस्था में दिया बड़ा योगदान
आरबीआई के गवर्नर के रूप में काम करने के दौरान उर्जित पटेल ने भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दिया। देश में महंगाई को कंट्रोल में लाने के लिए उन्होंने 4% की आईएमएफ बनाने की सिफारिश की थी, जिसे सरकार के द्वारा स्वीकार भी गया। उनकी इस नीति के कारण देश की अर्थव्यवस्था को आज भी स्थिर रखने में मदद मिलती है।
करियर की शुरुआत
उर्जित पटेल का जन्म केन्या में हुआ था। लंदन यूनिवर्सिटी से बीएससी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एम.फिल और येल यूनिवर्सिटी से उन्होंने इकोनॉमी में पीएचडी की। साल 1990 में उन्होंने आईएमएफ से ही अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1990 में आईएमएफ से की थी। साल 1992 में जब वे आईएमएफ के डिप्टी रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव थे उस समय वे दिल्ली आए थे। उन्होंने 9 केवल भारत बल्कि म्यांमार अमेरिका और बहामास जैसे देशों के लिए काम किया।
इसके बाद वह भारत के वित्त मंत्रालय में सलाहकार के रूप में साल 1998 से 2000 तक काम करते रहे। इतना ही नहीं वे रिलायंस इंडस्ट्री, गुजरात स्टेट पैट्रोलियम कॉरपोरेशन, आईडीएफसी लिमिटेड, एमसीएक्स लिमिटेड जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं पर काम कर चुके हैं। आरबीआई में काम की शुरुआत साल 2013 में उन्होंने डिप्टी गवर्नर के रूप में की थी। इसके बाद साल 2016 में उन्हें गवर्नर नियुक्त कर दिया गया। अब वे आईएमएफ के कार्यकारी निर्देशक बन चुके हैं। इसके पहले इस पोजीशन पर कवि सुब्रमण्यम कम कर रहे थे जिनका कार्यकाल अप्रैल 2025 में खत्म हुआ।
नोटबंदी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका
जब गवर्नर के रूप में उर्जित पटेल के कार्यकाल को केवल दो ही महीने बीते थे तभी पीएम नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी। उस समय 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद कर दिया गया था। उस दौरान नोटबंदी की पूरी प्रक्रिया को संभाल रही आरबीआई की टीम का नेतृत्व उर्जित पटेल कर रहे थे।
भारतीय अर्थव्यवस्था में दिया बड़ा योगदान
आरबीआई के गवर्नर के रूप में काम करने के दौरान उर्जित पटेल ने भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दिया। देश में महंगाई को कंट्रोल में लाने के लिए उन्होंने 4% की आईएमएफ बनाने की सिफारिश की थी, जिसे सरकार के द्वारा स्वीकार भी गया। उनकी इस नीति के कारण देश की अर्थव्यवस्था को आज भी स्थिर रखने में मदद मिलती है।
करियर की शुरुआत
उर्जित पटेल का जन्म केन्या में हुआ था। लंदन यूनिवर्सिटी से बीएससी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एम.फिल और येल यूनिवर्सिटी से उन्होंने इकोनॉमी में पीएचडी की। साल 1990 में उन्होंने आईएमएफ से ही अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1990 में आईएमएफ से की थी। साल 1992 में जब वे आईएमएफ के डिप्टी रेजिडेंट रिप्रेजेंटेटिव थे उस समय वे दिल्ली आए थे। उन्होंने 9 केवल भारत बल्कि म्यांमार अमेरिका और बहामास जैसे देशों के लिए काम किया।
इसके बाद वह भारत के वित्त मंत्रालय में सलाहकार के रूप में साल 1998 से 2000 तक काम करते रहे। इतना ही नहीं वे रिलायंस इंडस्ट्री, गुजरात स्टेट पैट्रोलियम कॉरपोरेशन, आईडीएफसी लिमिटेड, एमसीएक्स लिमिटेड जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं पर काम कर चुके हैं। आरबीआई में काम की शुरुआत साल 2013 में उन्होंने डिप्टी गवर्नर के रूप में की थी। इसके बाद साल 2016 में उन्हें गवर्नर नियुक्त कर दिया गया। अब वे आईएमएफ के कार्यकारी निर्देशक बन चुके हैं। इसके पहले इस पोजीशन पर कवि सुब्रमण्यम कम कर रहे थे जिनका कार्यकाल अप्रैल 2025 में खत्म हुआ।
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